
केरल को कम्युनिस्टों का गढ़ कहा जाता है. दशकों से लेफ्ट का सेंटर रहा है. आज भी यहां लेफ्ट की सरकार है. केरल बीते दिनों खूब सुर्खियों में रहा. कारण कि जून में खराब मौसम के कारण ब्रिटेन का एफ-35 बी फाइटर जेट फंस गया. महीनों तक यह लड़ाकू विमान फंसा रहा. इसकी मौजूदगी ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा. केरल में एफ-35बी विमान कांड के बहाने आज हम उस कहानी को जानेंगे, जब शीत युद्ध के दौरान केरल की धरती पर पूरी दुनिया की नजर थी. जी हां, शीत युद्ध के घटनाक्रम को याद करें तो केरल की धरती स्पाई यानी जासूसों की भी धरती रही है. शीत युद्ध के दौर में दुनिया के दो पावर सेंटर सोवियत संघ रूस और अमेरिका ने केरल को अपने लिए स्पाई सेंटर के रूप में यूज किया. 1950 और 1960 के दशक में शीत युद्ध के दो अहम खिलाड़ी सोवियत रूस और अमेरिका ने केरल में अपने स्पाई नेटवर्क को केरल में खूब एक्टिव रखा. उस दौरान एक घटना ऐसी हुई, जिसमें पंडित नेहरू ने रूसी राजदूत को जमकर फटकारा था.
दरअसल, यह कहानी है साल 1957 की. केरल में पहली बार सीपीआई यानी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने जीत का परचम लहराया था. केरल में लेफ्ट की जीत से अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक खलबली मच गई थी. भारत में पहली बार किसी राज्य में लेफ्ट की सरकार बनी थी. अव्वल तो यह कि यह पहली बार था, जब लोकतांत्रिक तरीके से किसी कम्युनिस्ट पार्टी ने सत्ता हासिल की थी. जैसे ही केरल में लेफ्ट की सरकार बनी, वाशिंगटन से लेकर ब्रिटेन तक के होश उड़ गए. खुद नेहरू भी कम्युनिस्ट के बढ़ते प्रभाव से चिंतित थे. कारण कि भारत के राज्य में लेफ्ट की सरकार होने का मतलब था रूस का प्रभाव. जैसा पश्चिमी देश मानते थे.

